आज नमन है वीर जवानो का आज़ादी के दीवानो का,
उस आज़ाद की गलियो का , उस भगत सिंग के सपनो का.
उस बिस्मिल्लाह के जज़्बे का , उस राजगुरु के प्रेम का,
जिसने हुमको ये देश दिया जो आज खड़ा है सीश उठाए
आज नमन है उस नेताजी के जलवे को ,
जिसने अपने ही बूते पे आज़ाद हिंद का गठन किया , पूरी अग्रेज़ी हुकूमत की रातो की नींद का चैन लिया.
उस अदम्य साहस का , जिसपे दीवाने लोग हुए
आज नमन उस गाँधी को जो पगडंडी पे चलता था , पैदल ही पूरे भारत को बदल के रखने से ना डरता था
उस वीर झाँसी की रानी का , उस खुदीराम के साहस का ,
उस बिस्मिल्लाह के जज़्बे का , उस सुखदेव के चयल का .
आज नमन है उस कलाम को जिसने देख पे खुद को कुर्बान किया
इस मिट्टी को परमाणु का इनाम दिया,
देश के हर धीर का देश के हर वीर का.
आँखे नम हो जाती है , सर फक्र से उठ जाता है,
एक बार जो याद करो इन आज़ादी के दीवानो को .
अद्भुत है बलिदान उनका , अद्भुत है उनका देश प्रेम.
जीवन भी है कुर्बान तुमको , हे अमर सपूत बलिदानी.
ज़ै हिंद ज़ै भारत.
लेखक - प्रभात
उस आज़ाद की गलियो का , उस भगत सिंग के सपनो का.
उस बिस्मिल्लाह के जज़्बे का , उस राजगुरु के प्रेम का,
जिसने हुमको ये देश दिया जो आज खड़ा है सीश उठाए
आज नमन है उस नेताजी के जलवे को ,
जिसने अपने ही बूते पे आज़ाद हिंद का गठन किया , पूरी अग्रेज़ी हुकूमत की रातो की नींद का चैन लिया.
उस अदम्य साहस का , जिसपे दीवाने लोग हुए
आज नमन उस गाँधी को जो पगडंडी पे चलता था , पैदल ही पूरे भारत को बदल के रखने से ना डरता था
उस वीर झाँसी की रानी का , उस खुदीराम के साहस का ,
उस बिस्मिल्लाह के जज़्बे का , उस सुखदेव के चयल का .
आज नमन है उस कलाम को जिसने देख पे खुद को कुर्बान किया
इस मिट्टी को परमाणु का इनाम दिया,
देश के हर धीर का देश के हर वीर का.
आँखे नम हो जाती है , सर फक्र से उठ जाता है,
एक बार जो याद करो इन आज़ादी के दीवानो को .
अद्भुत है बलिदान उनका , अद्भुत है उनका देश प्रेम.
जीवन भी है कुर्बान तुमको , हे अमर सपूत बलिदानी.
ज़ै हिंद ज़ै भारत.
लेखक - प्रभात
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